खुदा-ए-सुखन, ‘मीर-तकी-मीर: आलेख (एस तौहीद शहबाज़)

यह बात याद रखने योग्य है कि हिन्दी और उर्दू भाषा के निर्माण के इतिहास में अठाहरवीं शताब्दी, जो मीर की शताब्दी है, सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है। उस समय तक भाषा का नाम केवल हिन्दी था । कभी-कभी उसे जबान-ए-देहलवी भी क... Read More...