जीवन के तमाम रंगों की ग़ज़ल : समीक्षा (प्रदीप कान्त)

हिन्दी ग़ज़ल की वर्तमान पीढ़ी में जिन लोगों ने तेज़ी से अपनी अलग पहचान बनाई है उनमे एक ज़रूरी नाम प्रताप सोमवंशी का भी है| इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी यदि यह कहा जाए कि समकालीन कविता की तरह प्रताप की ग़ज़ल ... Read More...

नए-नए जुमले और मुहावरे: कविता (डॉ मोहसिन खान)

सदियों से सत्ताधारी अपनी सत्ता के लालच में आमजन में पनपे भाई चारे को कभी जाति के नाम पर, कभी धर्म के नाम, तो कभी भाषा को हथियार बना कर आम जनता को बांटकर हमेशा अपनी सत्ता कि रोटियां सेकते  रहे  हैं | इसी दर्द को... Read More...