मेहनतकश के सीने में: कविता (अनवर सुहैल)

आप बीती जो जग में देखी..... कोयला खदान मजदूरों के बहाने दुनिया के मजदूरों की कुंठा, विषमता और बिडम्बना को खुद से गुजारकर शब्द देते कवि, लेखक 'अनवर सुहैल' ........| मेहनतकश के सीने में  कितना कम सो पाते हैं ... Read More...