वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे: यात्रावृतांत

विकास या विकास की गति को शब्दों में, किसी सपनीली दुनिया की तरह, अपनी कल्पनाओं की उड़ान से भी एक कदम आगे के स्वरूप का वर्णन कर लें किन्तु यथार्थ के धरातल पर तमाम विकास के दावे और वादे कितना मूर्त रूप ले पाए हैं य... Read More...

नो हार्ड शोल्डर फॉर फोर हंड्रेड यार्ड्स: यात्रावृतांत ‘लंदन, यूरोप’

बहुत कम लोग यात्रा वृत्तांत को ज़रिया बनाकर किसी दुसरे और दूर के भूभाग वहाँ की आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक स्थितियां-परिस्थितियाँ बेहद पठनीय और रोचक अंदाज़ में लिख और बयाँ कर पाते हैं | वागर्थ के संपादक 'एकांत श्... Read More...