अंतिम युद्ध : नाटक (राजेश कुमार)

कइयों बार इन सवालों के व्यूह से गुजरा हूं कि आज जब देश आजाद है, विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र यहां स्थापित है, विश्व की राजनीति में लगातार किसी न किसी रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है, कला-सौंदर्य-अंतरिक्ष क... Read More...

आखिर युद्ध की परिणति…? आलेख (रामजी तिवारी)

फ्रेंच राष्ट्रपति ‘ओलांद’ के इस वक्तव्य का क्या अर्थ है कि “अब हम दयारहित आक्रमण करेंगे |” क्या उस दयारहित आक्रमण का निशाना सिर्फ आइएसआइएस पर ही होगा, या कि उस इलाके की सामान्य जनता पर भी | या कि ‘कोलैट्रेल डैम... Read More...