हिम्मत न हारना, मेरे बच्चो!: कहानी (मैक्सिम गोर्की)

पुरानी हड्डियों को ऐसे सीधा करने के बाद वह दरवाज़े के निकट एक पत्थर पर बैठा जाता है, जाकेट की जेब से एक पोस्टकार्ड निकालता है, पोस्टकार्ड थामे हुए हाथ को आँखों से दूर हटाता है, आँखें सिकोड़ लेता है और कुछ कहे बिन... Read More...

रंगमंच में अनुदान का ऑडिट कराया जाए : आलेख (अनीश अंकुर)

‘‘थियेटर में ग्रांट देने का काम एन.एस.डी को सौंप दिया गया है। बहुत सारे लोग परेशान हैं कि अब तो सारा अनुदान एन.एस.डी के लोगों को ही मिलने वाला है,.... उनकी चिंता जायज है। पीछे के आंकड़ों और रंगमहोत्सव इसका जीता-... Read More...