ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया । मगर हम हैं कि शर्म भी आती नहीं । आज राष्ट्... Read More...

‘आया हमीं में से है’: अखिलेश्वर पांडेय की कविताएँ…

अखिेलश्वर पांडेय का एक कविता संग्रह ‘पानी उदास है’ हालिया प्रकाश्य है। भारी-भरकम शब्दावलियों से बाहर फिजाओं में तत्सम और तद्भव के बीच तैर रहे देसी आमफहम शब्दों से लैस इनकी कविता पढऩे पर एकबारगी यह कवितानुमा लगत... Read More...

ग्लोबल युग का क्रिकेटीय राष्ट्रवाद: संपादकीय (मज्कूर आलम)

ग्लोबल युग का क्रिकेटीय राष्ट्रवाद  मज्कूर आलम हम देशवासियों की तमाम शुभकामनाओं के बावजूद भी भारत टी-20 विश्वकप से बाहर हो गया । हालांकि क्वार्टर फाइनल बन गए आस्ट्रेलिया के साथ हुए कठिन मुकाबले में उसे हरा क... Read More...