ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया । मगर हम हैं कि शर्म भी आती नहीं । आज राष्ट्... Read More...

दिल के खोह से बाहर आओ प्रेम: कवितायेँ (निवेदिता)

'क्या जुल्मतों के दौर में भी गीत गाये जायेंगे....... हाँ जुल्मतों के दौर में ही गीत गाये जायेंगे' ..... प्रेम गीत, जिसका हर शब्द इंसानियत के भीतर संवेदना बनकर स्पंदन करने की क्षमता रखता हो | यूं तो निवेदिता की ... Read More...