मध्यरात्रि का विषाद: एवं अन्य कवितायेँ (अभिनव निरंजन)

शांत, शिथिल, सोई सी पानी के ऊपर पसरी काई की परत पर जैसे कोई कंकड़ फैंक दिया हो, कुछ इसी तरह वर्तमान समय के साथ पसरती आत्मविस्मृति की परत पर वैचारिक उद्वेलन के रूप में नज़र आती हैं अभिनव निरंजन की कविताएँ .... ... Read More...