कट्टी बट्टी का फ्लॉप शो : फिल्म समीक्षा (संध्या नवोदिता)

कट्टी बट्टी का फ्लॉप शो संध्या नवोदिता कट्टी बट्टी का बहुत इंतज़ार था. इधर कंगना रानौत ने फैशन, क्वीन, तनु वेड्स मनु, फिर तनु मनु पार्ट दो से उम्मीदें इतनी बढ़ा दीं कि कंगना के नाम पर किसी भी फिल्म की एडवांस ब... Read More...

जिस्म ही नहीं हूँ मैं : कविता (संध्या नवोदिता)

कविता के रूप में आकार लेती आधुनिक स्त्री जो लवरेज है अपने समय के ज़िंदा सवालों से, जो ढहा चुकी है सामाजिक रुढियों के मानवीय अंतर के किले को,.... खड़ी होती अपने पैरों पर इंसानी रूप में बुनने को एक आकाश सामाजिक भाग... Read More...

जब उम्मीदें मरती हैं: एवं अन्य कविताएँ (संध्या नवोदिता)

धूसर एकांत में समय से टकराती मानवीय व्याकुलता से टूटते दर्प और निरीह वीरान में सहमी खड़ी इंसानियत के अवशेषों के साथ चलती जिन्दगी की कल्पना बेहद खतरनाक होती है | वक़्त के चहरे पर और गाढी होती धुंध भरी परत को चीर क... Read More...

प्रो. लाल बहादुर वर्मा को प्रथम शारदा देवी शिक्षक सम्मान, संध्या नवोदिता

20 दिसम्बर| इलाहाबाद संग्रहालय में रविवार को शारदा देवी ट्रस्ट की ओर से प्रथम शारदा देवी शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया| जाने माने इतिहासकार, लेखक और शिक्षाविद प्रो. लाल बहादुर वर्मा को उनके उत्कृष्ट सा... Read More...

‘डिअर जिन्दगी’ व-नाम लव यू ज़िन्दगी..: फिल्म समीक्षा (संध्या नवोदिता)

जिंदगी में प्यार बहुत से रिश्तों से मिलता है लेकिन हमें बचपन से भावनाओं को दबाना सिखाया जाता है. रोओ तो कहा जाता है रोते नहीं, स्ट्रांग बनो. किसी पर गुस्सा आये तो गुस्सा नहीं करो, स्माइल करो. ऐसे अनुकूलन करते ह... Read More...