यह सभ्यता की कौनसी जंग है !: कवितायें (नित्यानंद गायेन)

उतसव धर्मिता के समय में कवि की चेतन अभिव्यक्ति, आत्ममुग्ध वक़्त को झकझोर कर अपने दौर के यथार्थ पर लाने की हमेशा रचनात्मक कोशिश करती रही है | हालांकि कवि और उसकी अभिव्यक्ति को देश, काल या विचार की परिधि में बाँधन... Read More...