मासूम से राही मासूम रज़ा तक…: साक्षात्कार (हनीफ मदार)

राही मासूम रजा का नाम वर्तमान युवा वर्ग के बीच से उसी तरह गुमनाम होता जा रहा है जिस तरह प्रेमचन्द, त्रिलोचन शास्त्री, यशपाल, रांगेय राघव, नागार्जुन, मुक्तिबोध  जैसे अनेक नामों से वर्तमान बाजार में भटकी युवा पीढ़... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल होने के नाते उनके ताल्लुक के तार यहाँ के एक मोहल्ले राम नाराय... Read More...

मेरा मूल नाम कुछ और है…: ‘सलोनी किन्नर’ साक्षात्कार

"हर व्यक्ति की तरह है हम किन्नरों के भी अपने नियम बनाएं हुए है और उनका पालन करना पड़ता है। जैसे रोजमर्रा का काम, नहाना-धोना, पूजा -पाठ करना, मंदिर जाना आदि काम प्रमुख है । पर एक दर्द-सा दिल में हमेशा रहता है कि ... Read More...

‘आधा गांव’ का सम्पूर्ण दृष्टा, ‘राही’ साक्षात्कार (एम् फीरोज खान)

उर्दू अदब से शुरू होकर हिंदी साहित्य में बड़ा दख़ल रखने वाले 'राही मासूम रज़ा' के व्यक्तित्व और जीवन संघर्षों का परिचायक खुद उनका विपुल साहित्य है बावजूद इसके आपका नाम और साहित्यिक रचनाएं हमेशा चर्चाओं में रहे हैं... Read More...
मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं- गीताश्री (साक्षात्कार)

मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं- गीताश्री (साक्षात्कार)

पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति का घोषणापत्र बनाती हैं बल्कि स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को पूरी शिद्दत से सामने लाती हैं. वर... Read More...