शहीद एक प्रेरक चरित्र: सिने चर्चा (सैयद एस तौहीद)

अजीब विडम्बना है कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में भगत सिंह पर दर्जनों फिल्मे आने के बाद भी क्या एक भी फिल्म भगत सिंह को उनके वास्तविक विचार के साथ चित्रित कर सकी है.....? जिस पर आज चर्चा की जा सके.....बावजूद इसके... Read More...

दादा साहेब फ़ाल्के: भारतीय सिनेमा के अमिट हस्ताक्षर (एस तौहीद शहबाज़)

फ़ाल्के के जीवन मे फ़िल्म निर्माण से जुडा रचनात्मक मोड सन 1910 ‘लाईफ़ आफ़ क्राईस्ट’ फ़िल्म को देखने के बाद आया, उन्होने यह फ़िल्म दिसंबर के आस-पास ‘वाटसन’ होटल मे देखी | वह फ़िल्म अनुभव से बहुत आंदोलित हुए और इसके बाद... Read More...

भूमिका: सिनेमा की भाषा में: आलेख

"पिछली सदी के चालीस और पचास के दशक में मराठी मंच और फ़िल्म की प्रसिद्ध अभिनेत्री हंसा वाडेकर ने पत्रकार अनिल साधु के साथ मिल कर अपनी जीवनी लिखी। मराठी में इस आत्मकथा का शीर्षक ‘सांगत्ये आएका’ (सुनो और मैं कहती ह... Read More...