नव वर्ष पर ‘अश्विनी आश्विन’ की चंद ग़ज़लें…….

एक और वर्ष का गुज़रना यकीनन मानव सभ्यता का एक क़दम आगे बढ़ जाना, ठहरना…. एक बार पीछे मुड़कर देखना, ताज़ा बने अतीत पर एक विहंगम दृष्टि डालकर सोचना, क्या छूटा, क्या है जिसे पूरा होना था और न हुआ, क्या हम निराश ह... Read More...