हिन्दी के प्रयोग में सोशल मीडिया की भूमिका : आलेख (ब्रजेश कानूनगो )

ऐसे में सोशल मीडिया अपने तमाम खतरों और अतिवादी प्रकृति के बावजूद भाषा विशेषकर हिन्दी और हिन्दी साहित्य के प्रसार में बहुत मददगार हो सकता है. हुआ भी है. थोड़े विवेक और समझदारी से किये इसके उपयोग से नए जमाने के नए... Read More...

बंद ए सी कमरों में झांकते होरी, धनियाँ…, संपादकीय (हनीफ मदार)

"ऐसा नहीं कि वर्तमान यथास्थिति का विरोध या प्रतिकार आज नहीं है, बल्कि ज्यादा है | एकदम राजनीतिज्ञों की तरह | कुछ हो न हो, बदले न बदले लेकिन व्यवस्थाई यथास्थिति का विरोध करके व्यक्ति सुर्ख़ियों में तो रहता ही है ... Read More...

बंदिशों में ‘सोशल मीडिया की स्त्री’: आलेख (अनीता मिश्रा)

निसंकोच हमारे समय और सामज ने तरक्की के कई पायदान और चढ़ लिए हैं ! तब सहज ही यह सवाल मन में आ खड़ा होता है कि क्या तरक्की में संवेदना के स्तर पर मानसिक वैचारिकी का कोई पायदान भी हम चढ़ पाए हैं ? इसके अलावा क्या इन ... Read More...

सोशल मीडिया के ‘जीजा जी’: व्यंग्य (अनीता मिश्रा)

"इन जीजाओं की किस्मत उस वक़्त खुल जाती है जब इन्हें कोई इनके जैसी मजेदार साली मिल जाती है. मसलन जीजा ने लिखा ‘बहुत शनदार’ तो साली साहिबा एक आँख बंद वाली इमोजी बनाते हुए लिखेंगी ..’क्या ? मैं या मेरी ड्रेस’ बस फि... Read More...

सोशल मीडिया का दिशा प्रवाह….! आलेख (सीमा आरिफ)

सोशल मीडिया,विकी,पॉडकास्ट,वेबब्लॉग,मिक्रोब्लॉगिंग जैसे टूल्स ने लोगो के ज्ञान प्राप्ति के माध्यमों को एक ऐसा मंच प्रदान किया जहाँ एक क्लिक से पूरी दुनिया  से जुडी जान कारी उनके सामने फैली पडी थी, .वहीँ लोगो के ... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

प्रेम-गली अति सांकरी…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

प्रेम-गली अति सांकरी... बसंत और मधुमास से गुज़रते हुए दृष्टि, वर्तमान समय में राजनैतिक इच्छाशक्ति के चलते पूरे सामाजिक परिवेश में एक ख़ास तरह के बदलाव पर आकर ठहर जाती है | ऐसा महसूस होने लगा है कि चारों तरफ अतार... Read More...