साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग 5” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"डॉ रशीद जहाँ वैचारिक रूप से समृद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं और अपने वामपंथी पति महमूद ज़फर के साथ सभी राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में सहयोग करती थीं। 1936 में जब प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई और लखनऊ में ... Read More...

सामाजिक परिवर्तन के अंतर्द्वंदऔर आधा गाँव: शोध आलेख

प्रयोगधर्मी साहित्यकार राही मासूम रजा़ ने अपनी लेखनी द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश को बहुत ही सूक्ष्मता से शब्दबद्ध किया है। आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सन् 1966 में लिखा गया ‘आधा गाँव’ उपन्यास राही की प्रतिनिधि रचना... Read More...

मीठा कुनैन नहीं स्त्री विमर्श: आलेख (ज्योति कुमारी)

‘‘पुरुष भी विचित्र है। वह अपने छोटे से सुख के लिए स्त्री को बड़ा से बड़ा दुख दे डालता है और ऐसी निश्चिंतता से, मानो वह स्त्री को उसका प्राप्य ही दे रहा है। सभी कर्तव्यों को वह चीनी से ढकी कुनैन के समान मीठे-मीठे ... Read More...