स्त्री जब पुरुष के साथ…! एवं अन्य कविताएँ (सीमा आरिफ)

मशीनी सभ्यता से मानवीय रिश्तों की गर्माहट से तपती ज़मीन को खोज लाना लेखकीय जिद है जैसे जीवित किन्तु इंसानी अवशेषों का प्रमाण | कुछ ऐसी ही ज़िद है "सीमा आरिफ़" की  रचनाओं में जो भावुक स्पर्श और भ्रामक स्पंदन के बीच... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘नवीं क़िस्त’ ( नमिता सिंह)

राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न कार्यक्रमों के नेतृत्व में हिन्दू स्त्रियों के अलावा मुस्लिम, पारसी और मार्गरेट कूजीन्स व ऐनी बेसेंट जैसी विदेशी महिलाएँ भी थीं।  राष्ट्रीय आंदोलन ने यह भी प्रमाणित किया कि महिलाओं क... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘दसवीं और अंतिम क़िस्त ( नमिता सिंह)

"1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने भंवरी देवी केस के प्रकाश में कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने हेतु कार्यस्थल के लिये जारी निर्देशों का पालन अनिवार्य करते हुए हर विभाग, संस्थान चाहे सरकारी हो या निजी स्तर... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ :आलेख (नमिता सिंह)

"स्त्री शिक्षा के लिये समर्पित रुकैया सखावत हुसैन का साहित्य में भी बड़ा योगदान है। वे उन प्रारंभिक महिलाओं में हैं जिन्होंने स्त्री विरोधी सामाजिक और धार्मिक रूढ़ियों के विरुद्ध तर्कपूर्ण ढंग से लिखा और साथ ही स... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ : आलेख (नमिता सिंह)

इक्कीसवीं सदी में हम स्त्रियाँ जिन्होंने स्वतंत्रता, समानता और विकास के अधिकार प्राप्त कर सृजन क्षेत्र में और समाज में अपने लिये स्थान बनाया, परंपरा जनित परिवार अथवा व्यवस्था जनित समाज के स्तर पर होने वाले अन्य... Read More...

बस मैं हूं घूमती हुई पृथ्वी पर बिल्कुल अकेली : कवितायें (अंकिता पंवार)

कविता प्रेम है, प्रकृति है, सौन्दर्य है और सबसे ऊपर एक माध्यम है खुद के प्रतीक बिम्बों में समाज के धूसर यथार्थ को उकेरने का | जैसे खुद से बतियाते हुए मानस को सुनाना या मानस से बतियाते हुए खुद को सुनाना | कुछ ऐस... Read More...

प्यार मेरा : एवं स्त्री: कविता (डॉ0 रज़िया बेग़म)

प्रेम गीत या प्रेम कविता भी आक्रान्ता, सामंती मानसिकता की प्रबल खिलाफत ही है इस लिए भी प्रेम कविताएँ लिखी और पढ़ी जानी चाहिए .....| 'डॉ० रज़िया' की कविता कुछ ऐसा ही एहसास है |....  प्यार मेरा : एवं स्त्री  तु... Read More...
मैं पीछे क्यों रहूँ

महावारी या महामारी: संपादकीय (अनीता चौधरी)

एक बात जो मुझे बचपन से लेकर आज तक मेरे ही घर में चुभती रही है, जब भी मुझे मासिक धर्म शुरू होता है मेरी माँ मुझे अपने पूजा वाले कमरे में नहीं जाने देती हैं। मुझे बहुत खराब लगता है । मैंने उन्हें बहुत समझाने की क... Read More...