‘दीबा नियाज़ी’ की कविताएँ॰॰॰

अतृप्त मानवीय इच्छाओं के ऊपर बेहतर ज़िंदगी का भ्रमित आवरण बुनते सुकोमल सपने दिखा कर, इंसानी जज़्बातों से खेलते हुए उन्हें अपने क़ब्ज़े में कर, इस्तेमाल की वस्तु बना लेने की सरल प्रक्रिया का, वर्तमान तकनीकी समय ... Read More...

अमृतसर टू कनेडा : लघुकहानी (अमिता महरौलिया)

‘‘मुंडा सिंगापुर दा है ओथे ही एक छोटा जिहालया होया है। मुंडा जाट्ट है, मैं देख लिया है तुसी बस हां करो जी!’’ मनप्रीत लस्सी का गिलास रखते बोली... ‘‘जी गीत ता एकदम गां वरगी है। बस तुसी भी हां करो जी।’’ ...अरे भ... Read More...