समय के झरोखे से हरिशंकर परसाई… आलेख

हरिशंकर परसाई केवल लेखक कभी नहीं रहे. वे लेखक के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी थे. उनका समूचा जीवन आन्दोलनों और यूनियनों से जुड़ा रहा. आन्दोलन छात्रों के, श्रमिकों के, शिक्षकों के, लेखकों के भी. वे लेखक के रूप में अपनी... Read More...

दो नाक वाले लोग: व्यंग्य (हरिशंकर परसाई)

"कुछ नाकें गुलाब के पौधे की तरह होती हैं। कलम कर दो तो और अच्छी शाखा बढ़ती है और फूल भी बढ़िया लगते हैं। मैंने ऐसी फूलवाली खुशबूदार नाकें बहुत देखीं हैं। जब खुशबू कम होने लगती है, ये फिर कलम करा लेते हैं, जैसे ... Read More...

हिंदी व्यंग्य की धर्मिक पुस्तक- परसाई: आलेख (प्रेम जनमेजय)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ”  का तीसरा दिन ……..’प्रेम जनमेजय’ का आलेख ) हिंदी व्यंग्य साहित्य में यह निरंतर होता आया है और हो रहा है कि हास्य-व्यंग्य को एक हाईफन से जोड़ देने के कारण उसे भाई-बहन सा मा... Read More...
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क्या समय है…? परसाई के पुनर्मुल्यांकन का : आलेख (एम्0 एम्0 चंद्रा)

(“हरिशंकर परसाई:–चर्चा ज़ारी है……” के अंतिम और परसाई के जन्म दिन पर…….‘एम० एम० चंद्रा’  का आलेख’) “इस बात को हम अच्छी तरह से जानते है की परसाई अपने युगबोध को साथ लेकर चल रहे थे. जब हम परसाई का मूल्यांकन करेंगे ... Read More...
यूनुस खान

सुनिए हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य ‘एक मध्‍यमवर्गीय कुत्‍ता’ (आवाज़ यूनुस ख़ान की)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है …….” के आठवे दिन …….सुनते हैं परसाई की व्यंग्य रचना ‘एक मध्‍यमवर्गीय कुत्‍ता’ “यूनुस खान” की आवाज़ में ‘) यूनुस खान हरिशंकर परसाई हरिशंकर परसाई का व्‍यंग्‍य ‘एक मध्‍य... Read More...