स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आठवीं क़िस्त (नमिता सिंह)

1917 में ऐनी बेसेंट (जो होमरुल लीग की संस्थापकों में थी) उन्होंने मार्गेट कूजिंस, सरोजनी नायडू समेत अन्य अनेक कांग्रेसी महिलाओं के साथ स्त्रियों के वोट देने के अधिकार की मांग की। ऐनी बेसेंट का विचार था कि होमरु... Read More...

पत्रकारिता के अब उद्देश्य बदल गये हैं !: आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज व्यवसायिकता समाज और राजनीति की आधारशिला है। आज़ादी मिलने के बाद भी प्रमुख अख़बार और पत्रिकाएँ बड़े व्यापारिक संस्थानों से जुड़ी थीं लेकिन उनके लेखक-संपादक-स्तंभकारों को पर्याप्त वैचारिक स्वतंत्रता थी। वे जन-विर... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख ‘तीसरी क़िस्त’ (डॉ0 नमिता सिंह)

सुसंगठित रूप में स्त्री अधिकारों के लिये आंदोलन उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के शुरूआती दशक से ही माने जा सकते हैं। लैंगिक असमानता की पोषक सामाजिक व्यवस्था के बदलाव और स्त्री अधिकारों के लिये संघर्ष... Read More...

मेरे समय में नेहरू: आलेख (अभिषेक प्रकाश)

नेहरू को हमने किताबों के माध्यम से जाना जरूर पर सबसे शिद्दत से मोदी युग में ही महसूस किया। एक घटना याद आ रही है मुझे जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं आपका प्रधानसेवक हूं। तभी मुझे त्रिमूर्ति की याद आई जिसके प... Read More...

टू वीमेन: युद्ध काल में स्त्री: आलेख (प्रो0 विजय शर्मा)

''युद्ध का स्त्री पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाने वाली अच्छी फ़िल्मों की संख्या और भी कम है। ‘टू वीमेन’ उन्हीं कुछ बहुत अच्छी फ़िल्मों से एक है। ‘टू वीमेन' उपन्यास युद्ध काल में स्त्री जीवन की विभीषिका का सचित्र, उ... Read More...
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एफ जी एम / सी यानि ‘योनि’ पर पहरा: आलेख (नीलिमा चौहान)

स्त्री  के बाहरी यौनांग यानि भग्नासा को स्त्री देह के एक गैरजरूरी , मेस्क्यूलिन और बदसूरत अंग के रूप में देखने की बीमार मानसिकता  का असल यह है कि पितृसत्ता को इस अंग से सीधा खतरा है । इस अंग के माध्यम से महसूस ... Read More...

महाश्वेता देवी का जीवन और साहित्य: आलेख (कृपाशंकर चौबे)

महाश्वेता देवी को याद करते हुए 'कृपाशंकर चौबे' का आलेख ........ "संघर्ष के इन दिनों ने ही लेखिका महाश्वेता को भी तैयार किया। उस दौरान उन्होंने खूब रचनाएँ पढ़ीं। विश्व के मशहूर लेखकों-चिंतकों की रचनाएँ, इलिया एर... Read More...