रात बिखरने लगी है: एवं अन्य कविताएँ (नीता पोरवाल)

जैसे रेगिस्तान की तपती दोपहरी में पानी का दिख भर जाना भी तृषाग्नि को असीम शांति से भरकर थके क़दमों में भी एक अजीब जोश का संचरण कर देता है ......ठीक ऐसे ही जीवन संघर्ष की आपा-धापी, एवं वैचारिक द्वंद्ध की गंभीरता ... Read More...

‘नीता पोरवाल’ की दो कवितायेँ

(नीता पोरवाल की प्रस्तुत कविताऐ श्रमिक जीवन की त्रासद स्थिति और भरपेटों के नकली दुखों की पड़ताल करती है...संपादक ) १-  कह सकोगे क्या ? हम मेहनतकशों की बाजुओं की ताकत और ज़ज्बा देख उद्व्गिन रहते हो त... Read More...

‘निलय उपाध्याय’ की दो कवितायेँ

कबीर नगर   तुम्हारा नगर तो अजीब है कबीर सच कहूं तो अदभुत, क्या तुम्हे पता था इसीलिए रच दिए एक साथ दो दो प्रतीक और किया उलटवासियों का विधान सच कहता हूं मजा आ गया उलट बांसिया उलट रही है ,पुलट रही है ... Read More...

पिंजर पर टंगी त्वचा एवं अन्य कविता (पुलकित फिलिप)

23 वर्षीय भगत सिंह आज तक युवाओं के प्रेरणा श्रोत हैं ..... यह अलग बात है कि कम ही युवा पीढ़ी भगत सिंह को महज़ एक व्यक्ति के रूप में ही नहीं उन्हें उनके सम्पूर्ण विचार के साथ जानती पहचानती है, और यह बात कहने से नह... Read More...

‘श्वेता मिश्र’ की कवितायें

नाइजीरिया में फैशन डिजाईनर के रूप कार्यरत 'श्वेता मिश्र' की कवितायें निच्छलता के साथ मुक्त रूप से स्त्री मन की उस अभिव्यंजना के तरह नज़र आती हैं जो न केवल लेखकीय अभिव्यक्ति है बल्कि कहा जाय कि वर्तमान सामाजिक मा... Read More...

प्यार मेरा : एवं स्त्री: कविता (डॉ0 रज़िया बेग़म)

प्रेम गीत या प्रेम कविता भी आक्रान्ता, सामंती मानसिकता की प्रबल खिलाफत ही है इस लिए भी प्रेम कविताएँ लिखी और पढ़ी जानी चाहिए .....| 'डॉ० रज़िया' की कविता कुछ ऐसा ही एहसास है |....  प्यार मेरा : एवं स्त्री  तु... Read More...

मेहनतकश के सीने में: कविता (अनवर सुहैल)

आप बीती जो जग में देखी..... कोयला खदान मजदूरों के बहाने दुनिया के मजदूरों की कुंठा, विषमता और बिडम्बना को खुद से गुजारकर शब्द देते कवि, लेखक 'अनवर सुहैल' ........| मेहनतकश के सीने में  कितना कम सो पाते हैं ... Read More...

गद्दार कुत्ते: एवं अन्य कविताएँ (दामिनी यादव)

कविता से हमेशा ही सौन्दर्य टपके ऐसा नहीं होता बल्कि विचलन भी होता है जब कविताई बिम्ब हमें अपनी सामाजिक, राजनैतिक स्थितियों के विकृत हालातों के रूप में नज़र आते हैं | लेखकीय दृष्टि से गुज़रता अपने समय और समाज का क... Read More...

सरकारी कलाभवन और तलाक शुदा औरतें: कविताएँ (पंखुरी सिन्हा)

(पंखुरी सिन्हा की कविताओं में कवि की सोच और संवेदना मुखर होकर प्रकट होती है. स्त्री-विमर्श के नये आयाम खुलते हैं. खासकर सरकारी कलाभवन वाली कविता तो ज़बरदस्त है...मैं इन कविताओं से मुतास्सिर हूँ कि आपके पास कथ्य-... Read More...

उसका प्रेमी: एवं अन्य कवितायेँ (प्रेमा झा)

कविता के अंतर्मन में झांकते शब्दों से प्रेम को परिभाषित करतीं 'प्रेमा झा' की कविताएँ ......| उसका प्रेमी  प्रेमा झा तस्वीर का आगाज़ जाने कब हुआ तब जब आइना भी नहीं खोजा गया था! खुद को भी न पहचानता वो शख्... Read More...