क़ातिल जब मसीहा है: एवं अन्य कवितायेँ

जिंदगी के कई जीवंत पहलुओं से सीधे रूबरू करातीं 'शहनाज़ इमरानी' की कविताएँ ..... क़ातिल जब मसीहा है  शहनाज़ इमरानी सिर्फ़ लात ही तो मारी है भूखा ही तो रखना चाहते हैं वो तुम्हें नादान हो तुम भीख मांगते हो तु... Read More...

किसी ईश्वर की तरह नहीं: एवं अन्य कवितायेँ (विमलेश त्रिपाठी)

मानवीय प्रेम को रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करतीं 'विमलेश त्रिपाठी' की तीं कविताएँ ..... किसी ईश्वर की तरह नहीं  विमलेश त्रिपाठी मेरी देह में सूरज की पहली किरणों का ताप भरो थोड़ा शाम का अंधेरा रात का डर ... Read More...

प्रेम, एवं अन्य कवितायें (सुरेन्द्र रघुवंशी)

सामाजिक, राजनैतिक संकीर्णताओं के खतरनाक थपेड़ों से सदियों से जूझती आती प्रेम की अविरल धार को परिभाषित करते हुए उस सामाज के जटिल ताने-बाने में दूध और पानी की तरह घुल रहे बाज़ारी और राजनैतिक दुष्प्रभाव के बीच वर्तम... Read More...

काला – हीरा: कविता (अशोक कुमार)

कोल इंडिया में कार्यरत 'अशोक कुमार' की कविताएँ कोयले की कालिख के भीतर से झांकती धवल जीवन की लालसाएं एवं इंसानी जिजीविसा की ज़िंदा तस्वीरें हैं .......| - संपादक  काला - हीरा ( बचपन में )   अशोक कुमार कोय... Read More...

अशोक कुमार पांडेय, की कवितायें

इधर हमारे आसपास किसी न किसी मुद्दे पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार हमले देखे गए हैं। हमारे जीवन में  ऐसे हालात बार-बार सामने आते रहे हैं कि हम जनगीतों की सामाजिक जरूरत समझें .....। प्रतिरोध का यही रचनात्मक नज... Read More...

मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है: एवं अन्य कवितायें (तेजप्रताप नारायण)

जिंदगी के कठोर सच, संघर्ष एवं मानवीय उम्मीदों पर गहराते अंधेरों को बेबाकी से बयाँ करतीं 'तेज प्रताप नारायण' की कविताएँ .........| - संपादक मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है   तेजप्रताप नारायण मैं मेरा परिचय... Read More...

घर वापसी : एवं अन्य कवितायेँ

ये कवितायें एक तरफ जीवन से रूप,रंग गंध लेती हैं तो दूसरी तरफ समाज की नब्ज़ पर भी हाथ रखती हैं। पितृसत्ता के आवरण में चलने वाले शोषण और फरेब के अनेक रूपों को अनावृत्त करती हैं, सवाल उठती हैं। 'रूपाली सिन्हा' की  ... Read More...

चुप रहना कविता का धर्मः डॉ0 रामवचन राय

 साहित्यिक गतिविधियों के अंतर्गत पटना से 'प्रभात सरसिज' के काव्य संग्रह ‘लोकराग‘ के लोकार्पण पर 'अरुण नारायण' की रिपोर्ट ......| चुप रहना कविता का धर्मः डॉ0 रामवचन राय  अरुण नारायण 'प्रभात सरसिज' के काव्य... Read More...

आत्महत्या, एवं अन्य कवितायें (शहनाज़ इमरानी)

सामाजिक एवं राजनैतिक दृष्टि से निरंतर होते मानवीय क्षरण को देखती 'शहनाज़ इमरानी' की कवितायें ......... आत्महत्या  शहनाज़ इमरानी आत्महत्या पलायन है आत्महत्या की सोच अपरिपक्व होती है मुझे मालूम है मेरी ... Read More...

दो गज़ ज़मीन, एवं अन्य कवितायें (अनुकृति झा)

हमरंग प्रतिवद्ध है उन तमाम संभावनाओं से परिपूर्ण कलमकारों को स्थान देने के लिए जो अपनी रचनाओं को लेकर किसी विशिष्टता के विभ्रम में नहीं हैं बल्कि स्पष्ट और प्रयासरत हैं, वेहतर सउद्देश्य रचनाशीलता के लिए | इस कड़... Read More...