लेखक: कहानी (मुंशी प्रेमचंद)

बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों से अपने लेखन से हिंदी साहित्य को "आम जन की आवाज़" के रूप में प्रस्तुत करने व साहित्य में सामाजिक और राजनैतिक यथास्थिति के यथार्थ परक चित्रण से, हिंदी साहित्य को एक नई दिशा देने वाले क... Read More...

हाकिम कथा: कहानी (अखिलेश)

"रजाई के भीतर आते ही उसे पास में पुनीत की अनुभूति होने लगती थी। अचानक वह भय से सिहर गई। हमेशा ऐसा ही होता रजाई उसे मादकता की नदी में डुबोकर खौफ़ की झाड़ी में फेंक देती थी। वर्तमान का अहसास ख़ौफ की झाड़ी ही था उ... Read More...

गोजर: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

यूं तो कहानी बहुत पहले लिखी गई .... लेकिन आज पढ़ते हुए लगता है जैसे हम सब पूरा समाज असहाय गोजर (कांतर) बनता जा रहा है और ऊपर रखी अनचाही ईंट का वज़न लगातार बढ़ रहा है ....... ' विजय शर्मा' की कहानी  गोजर  विजय... Read More...

महापंचायत…: कहानी (अभिषेक प्रकाश)

अभिषेक की कलम खासकर साहित्यिक विधा के तौर पर पूर्व नियोजित होकर लिखने की आदी  नहीं है | हाँ बस वे मानव जीवन की घटना परिघटनाओं पर वौद्धिक क्रिया-या प्रतिक्रिया पर अपनी कलम न घसीटकर, अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति को उ... Read More...

…और फिर परिवार: कहानी (मज्कूर आलम)

मज़्कूर आलम की कहानी 'और फिर परिवार' एक बेहद मजबूर, बेबस और लाचार लड़की की त्रासदी लगी, जो खुद को विकल्पहीन महसूस कर आत्महत्या कर लेती है, लेकिन पुनर्पाठ में लगा कि कई बार स्थितियां आपसे बलिदान मांगती हैं। रतिका... Read More...

नौ साल छोटी पत्नी: कहानी (रविन्द्र कालिया)

हिंदी साहित्य में रवींद्र कालिया की ख्याति उपन्यासकार, कहानीकार  और संस्मरण लेखक के अलावा एक ऐसे बेहतरीन संपादक  के रूप में रही, जो मृतप्राय: पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते हैं. रवींद्र कालिया हिंदी के उन गिने-... Read More...

बिटिया बड़ी हो गयी: कहानी (डॉ0 नंदलाल भारती)

"नरोत्तम- मुसीबत के माहौल में पले-बढ़े। मेरी भी नौकरी का कोई भरोसा नही था, मैं जातीय अयोग्यता की वजह से उत्पीड़न का शिकार हो चुका था । अपने तो खैर कोई शहर में थे नही । ये कामप्रसाद दूर गांव के सजातीय मिल गये थे। ... Read More...

समय के साथ संवाद करतीं ‘भीष्म साहनी’ की कहानी: आलेख (अनीश कुमार)

मानवीय संवेदनाओं और मानव मूल्यों के निरतंर क्षरण होते समय में सामाजिक दृष्टि से मानवीय धरातल से जुड़े साहित्यकारों का स्मरण हो आना सहज और स्वाभाविक ही है | वस्तुतः इनकी कहानियों और उपन्यासों से गुज़रते हुए वर्तमा... Read More...

अनुप्राणित: कहानी (हनीफ मदार)

प्रेम एक खूबसूरत इंसानीय व मानवीय जीवन्तता का एहसास है  जो किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय से बढ़कर होता है जिस पर किसी भी तरह की बंदिशे नहीं लगाई जा सकती क्योंकि  बिना प्रेम के मानव जीवन संभव नहीं होता | प्रेम से... Read More...

अब और नहीं: कहानी (फिरोज अख्तर)

चांद आज बहुत सुस्त लग रहा था। किसी की गोद में नहीं जा रहा था। आज ज्यादा ही छिरिया रहा था। मां की छाती से लगकर थोड़ी देर के लिए चुप हो जाता फिर रोने लगता। शाम होते ही उसका बदन गर्म होने लगा। रात में तबियत बिगड़ने ... Read More...