डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें…..

इंसानी ज़ज्बातों से होकर जीवन स्पंदन की तरह हरहराती किसी हवा सी गुज़रतीं अनीता सिंह की कुछ ग़ज़लें........ डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें.....  डॉ0 अनीता सिंह १-  ऐसा न था कि पुकारे नहीं थे वो सुनते हीं क्यों जो हमा... Read More...

नव वर्ष पर ‘अश्विनी आश्विन’ की चंद ग़ज़लें…….

एक और वर्ष का गुज़रना यकीनन मानव सभ्यता का एक क़दम आगे बढ़ जाना, ठहरना…. एक बार पीछे मुड़कर देखना, ताज़ा बने अतीत पर एक विहंगम दृष्टि डालकर सोचना, क्या छूटा, क्या है जिसे पूरा होना था और न हुआ, क्या हम निराश ह... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की ग़ज़लें

शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है ...... अश्विनी आश्विन की ग़ज़लें मस्तिष्क से होकर ह्रदय तक पहुंचकर उसी पानी की तरह विचल... Read More...

नीलाम्बुज की ग़ज़लें:

नीलाम्बुज ग़ज़ल और कवितायें सामान रूप से लिख रहे हैं | आपकी न केबल ग़ज़लें बल्कि कविताओं में भी राजनैतिक प्रभाव में बनती बिगड़ती सामाजिक मानवीय अमानवीय तस्वीरें साफ़ साफ़ झलकती हैं ….. | कवितायेँ फिर कभी आज हमरंग पर आ... Read More...