‘हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्ताँ हमारा’: व्यंग्य (आरिफा एविस)

"हिंदी दिवस" पर विशेष..... 'आरिफा एविस' की हिंदी व्यंग्य रचना..... और क्या बताऊँ  अम्मा!  कालेज पूरा किया तो नौकरी की तलाश शुरू की. नौकरी मिलती कहाँ आजकल, जॉब मिलती है .पर चाहिए वहां भी अंग्रेजी ही. एक रिशेप्श... Read More...

हिंदी को जरूरत है एक “क्यों” की: संपादकीय (हनीफ मदार)

हिंदी को जरूरत है एक “क्यों” की  हनीफ मदार फिर से हिंदी दिवस पर मैं असमंजस में हूँ हर साल की तरह, ठीक वैसे ही जैसे हर वर्ष मदर्स डे, फादर्स डे…….लम्बी सी लिस्ट है (कुछ और का आविष्कार और हो गया होगा, उसकी जान... Read More...