नये स्वरों की वाहिका-‘वाड्.मय’ पत्रिका :समीक्षा (डॉ अल्पना सिंह)

इस तीसरे वर्ग जिसे हिजड़ा, छक्का, ख्वाजासरा, किन्नर या थर्ड जेंडर आदि कहा जाता है, को समाज में वह सम्मान और स्थान नहीं मिलता जो अन्य दोनों वर्गों को प्राप्त है। यह वर्ग आज से नहीं बल्कि सदियों से समाज की प्रताड़न... Read More...

जिनकी दुआ को तरसे जमाना, उन्हें भी दुआ नसीब हो : समीक्षा लेख (पद्मा शर्मा)

जीवन जीने के लिए शरीर के समस्त अंग और अवयव अपनी-अपनी अहमियत रखते हैं। शरीर का कोई भी अंग यदि अपूर्ण है तो जीवन की दौड़ में कई बाधाएँ उपस्थित हो जाती हैं। समाज की विवाह संस्था की मूल धुरी पर आधारित जिन शारीरिक अव... Read More...

हाँ मैं किन्नर हूँ, ‘मनीषा महंत’ (थर्ड जेंडर) साक्षात्कार

15 अप्रैल 2014 को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा किन्नरों को थर्ड जेंडर घोषित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले के बाद इस समुदाय के प्रति समाज में सथापित कथित धारणाएं फिर से चर्चा के केंद्र में आई और पूर्व सथापित मान्य... Read More...