प्रेम, एवं अन्य कवितायें (सुरेन्द्र रघुवंशी)

सामाजिक, राजनैतिक संकीर्णताओं के खतरनाक थपेड़ों से सदियों से जूझती आती प्रेम की अविरल धार को परिभाषित करते हुए उस सामाज के जटिल ताने-बाने में दूध और पानी की तरह घुल रहे बाज़ारी और राजनैतिक दुष्प्रभाव के बीच वर्तम... Read More...

प्यास…. : कविता (शबाना)

मानव जीवन के चिंतन से गुज़रती संवेदनशील कविता बुनने का सार्थक प्रयास 'शबाना' की कलम से ........ प्यास....   शबाना पेन्सिल मिली, पैन मिला। एक कागज़ कहीं से ढूंढ लिया लिखने को मन विचलित हुआ पांच-दस मिनट ... Read More...