‘अट्टहास’ पत्रिका का नया प्रयोग: समीक्षा (आरिफा एविस)

पिछले काफी समय से नये और पुराने व्यंग्यकारों के लेखन पर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें या तो सिरे से नकार दिया जा रहा है या छपास की श्रेणी में डाला दिया जाता है. अकसर हाल फ़िलहाल लिखे जा रहे व्यंग्यों को सपाट बयानी कह... Read More...

पिंकीसिंह की प्रेरक कहानी, उर्फ़ पिक्चर अभी बाकी है..: व्यंग्य (ब्रजेश कानूनगो)

महात्मा जी ने कभी स्वच्छता का पाठ पढ़ाया था हमें। देश की हर सरकार बापू के विचारों को अपनाने को कृत संकल्पित रहती है, न भी रहती है तो यह विश्वास दिलाने का प्रयास जरूर करती है कि वह गांधीवाद के साथ है.और वह बापू क... Read More...

शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार: व्यंग्य (आरिफा एविस)

यह जंगलराज के गर्व की बात है कि जन्मजात राजा ही जंगल पर राज करे. राजा ने ये एलान कर दिया कि वह जन्मजात अधिकारों को कभी भी जंगल से हटने नहीं देगा. जो भी जंगलराज के जन्मजात कानूनों को तोड़ने की कोशिश करेगा दंड का ... Read More...

पानी नहीं है तो क्या हुआ कोक पियो, खेल देखो: व्यंग्य (आरिफा एविस)

"करीब दस राज्यों के साथ महाराष्ट्र के कई जिले सूखा ग्रस्त घोषित कर दिये गए. लेकिन अब लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, अगर कोई किसान पानी के नाम पर देशभक्ति में बाधा डालने की कोशिश करेगा तो देशभक्ति को बनाये र... Read More...

मई दिवस की संघर्ष गाथा: व्यंग्य (आरिफा एविस)

दिल्ली एन.सी.आर से सटे हुए क्षेत्र पूरी तरह से मजदूर बस्ती के रूप में पहचाने जाते हैं. हर रोज लाखों लोग 5 से 10 हजार रुपये तक की नौकरी करने के लिए दिल्ली,गाजियाबाद, गुडगाँव में साइकिलों पर सवार होकर या रेल में ... Read More...