कथा कहानी

कविता

कविता

जितेन साहू

बस मैं हूं घूमती हुई पृथ्वी पर बिल्कुल अकेली : कवितायें (अंकिता पंवार)

कविता प्रेम है, प्रकृति है, सौन्दर्य है और सबसे ऊपर एक माध्यम है खुद के प्रतीक बिम्बों में समाज के धूसर यथार्थ को उकेरने... Read More...
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हवाले गणितज्ञों के: एवं अन्य कविताएँ (अभिज्ञात)

अभिज्ञात, मानवीय रिश्तों के सूक्ष्म धागे के साथ सामाजिक,  आर्थिक  विषमताओं की समर्थ सार्थक पड़ताल कर रहे हैं अपनी इन दो क... Read More...

ऑडियो

सांकेतिक चित्र साभार google से

टोबा टेक सिंह: ऑडियो कहानी (आवाज़ ‘यूनुस खान’)

हर वक़्त में बेहद प्रासंगिक नज़र आती भारत विभाजन पर मानवीय त्रासदी की संवेदनशील दास्तान सी  'सआदत यूनुस खान हसन मंट... Read More...
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सुनिए ‘एक जीवी एक रत्‍नी एक सपना’ कहानी अमृता प्रीतम, (आवाज़ “ममता सिंह”)

आज  ‘हमरंग’ में सुनते  हैं, अमृता प्रीतम की कहानी ‘एक जीवी, एक रत्‍नी, एक सपना’। बी बी सी की रेडिओ उद्घोषक ‘ममता सिंह’ क... Read More...

किताबें

साभार गूगल

अवचेतन की चेतन से लड़ाई: ‘तमाशा’ (मजकूर आलम)

ऐसे ऊपर से शांत दिखने वाले अशांत समुन्दर में अगर कोई कंकड़ी भी मार दे तो जाहिर है कि उसमें हलचल मचेगी ही। और यही काम करती है तारा। और, अगर समुद्र में हलचल मचेगी तो ज्वारभाटा आएगा ही और ज्वारभाटा आएगा तो महासागर ... Read More...
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शहीद एक प्रेरक चरित्र: सिने चर्चा (सैयद एस तौहीद)

अजीब विडम्बना है कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में भगत सिंह पर दर्जनों फिल्मे आने के बाद भी क्या एक भी फिल्म भगत सिंह को उनके वास्तविक विचार के साथ चित्रित कर सकी है.....? जिस पर आज चर्चा की जा सके.....बावजूद इसके... Read More...
Dear Jindagi

‘डिअर जिन्दगी’ व-नाम लव यू ज़िन्दगी..: फिल्म समीक्षा (संध्या नवोदिता)

जिंदगी में प्यार बहुत से रिश्तों से मिलता है लेकिन हमें बचपन से भावनाओं को दबाना सिखाया जाता है. रोओ तो कहा जाता है रोते नहीं, स्ट्रांग बनो. किसी पर गुस्सा आये तो गुस्सा नहीं करो, स्माइल करो. ऐसे अनुकूलन करते ह... Read More...

शोध आलेख

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समकालीन हिन्दी आलोचना और कबीर: आलेख (संजय कुमार पटेल)

कबीर पर आज तक जितने भी आलोचक अपनी आलोचना से दृष्टिपात किए हैं वह आज भी सबको स्वीकार्य नहीं है । सभी लोग अपने-अपने अनुसार... Read More...
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बसेरे से दूर: विजन, शिल्प एवं भाषा: आलेख (नितिका गुप्ता)

"डाॅ. हरिवंशराय ने अपनी आत्मकथा का तीसरा खंड ‘बसेरे से दूर‘ 1971 से 1977 के दौरान लिखा। इस खंड में उनके इलाहाबाद विश्ववि... Read More...
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