रफ़ी साहेब की दीवानगी: आलेख (सैयद एस तौहीद )

सिनेमा सिने-चर्चा

एस. तौहीद शहबाज़ 108 2018-11-18

‘रफ़ी साहेब को पहला फिल्मी ब्रेक श्याम सुंदर ने एक पंजाबी फ़िल्म मे दिया, फ़िर जी एम दुर्रानी की फ़िल्म में पहले हिन्दी गीत के लिए नौशाद ने पहल की. उस जमाने में हुश्नलाल भगतराम व गीतकार राजेन्द्र कृष्ण के साथ कुछ स्पेशल गाने भी गाए . प्रधानमंत्री नेहरू ने बापू की हत्या के शोक में रफ़ी को गीत सुनाने को कहा, रफ़ी ने ‘बापू की अमर कथा‘ को गाया…….‘

रफ़ी साहेब की दीवानगी 

आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने: सख्शियत (सैयद एस तौहीद)

एस तौहीद शहबाज़

बचपन के दिनों में संगीत जुनून पर चर्चा करते हुए रफ़ी साहेब ने फ़कीर और एकतारा की बात कही थी. उन दिनों वह एकतारा लेकर चलने वाले फ़कीर के फ़न से बहुत प्रभावित रहे, फ़कीर अक्सर एकतारा पर कुछ गाते हुए दूर-दूर तक चले जाते हैं. जिस किसी ने फ़कीर को गाते सुना होगा,वह जानते हैं कि रफ़ी साहेब की दीवानगी यूं ही नही थी . बचपन में फ़कीर के जुनून को सलाम करते हुए बालक रफ़ी उससे सीख लेकर गायकी करते थे. यह प्रयास आने वाले स्वर्णिम भविष्य संकेत के रूप मे देखा जा सकता है . जब लाहौर पहुंचे तो वहां उस्ताद अब्दुल वहीद खान, जीवन लाल मट्टु एवं गुलाम अली खान की दुआ मिली.
इल्म से मुक्त होकर सबसे पहले रेडियो लाहौर मे संगीत सेवाएं दी, दरअसल संगीतकार फ़िरोज़ निज़ामी इस नगीना फनकार को परखकर यहां लाए थे. इस तरह कैरियर का आगाज़ हुआ, पहला फ़िल्मी गाना श्याम सुंदर के धुनों से सजी पंजाबी फ़िल्म मे रिकार्ड हुआ. सन चालीस के शुरुआती सालों मे लाहौर से बम्बई चले आए , रिश्तेदारों व दोस्तों की मदद से भिंडी बाज़ार में रहने का ठिकाना मिल गया . थोडा वक्त गुज़रने के बाद उनकी भेंट अब्दुल रशीद करदार, महबूब खान, नौशाद अली, फ़िरोज़ निज़ामी जैसे लोगों से हुई .

शुरुआत में श्याम सुंदर, जी एम दुर्रानी, नौशाद ने बहुत अच्छा साथ निभाया. आप को पहला फिल्मी ब्रेक श्याम सुंदर ने एक पंजाबी फ़िल्म मे दिया, फ़िर जी एम दुर्रानी की फ़िल्म में पहले हिन्दी गीत के लिए नौशाद ने पहल की. उस जमाने में हुश्नलाल भगतराम व गीतकार राजेन्द्र कृशन के साथ कुछ स्पेशल गाने भी गाए . प्रधानमंत्री नेहरू ने बापू की हत्या के शोक में रफ़ी को गीत सुनाने को कहा, रफ़ी ने ‘बापू की अमर कथा’ को गाया.
उन्हें उस जमाने के नामी संगीतकारों के साथ काम करने का मौका मिला . नौशाद व सचिन देव बर्मन का साथ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा. नौशाद साहेब रफ़ी की काबलियत से इस कदर प्रभावित हुए कि हिन्दी फ़िल्मों में ब्रेक नवाज दिया, अनमोल घडी एवं शाहजहां में गीत दिए . फ़िर तो जैसे नौशाद रफ़ी के आवाज़ के मुरीद रहे . रफ़ी साहेब ने नौशाद के लिए ‘दीदार’ , ‘आन’ , ‘उडन खटोला’ , ‘कोहीनूर’ ,’मुगल-ए-आज़म’ , ‘गंगा जमुना’ , ‘मेरे महबूब’ में गीत गाए. वहीं सचिन देव बर्मन की ‘प्यासा’ , ‘नौ दो ग्यारह’ , ‘काला पानी’ , ‘काला बाज़ार’ एवं ‘गाईड’ में भी गायकी का यादगार मिसाल पेश की.

पचास-साठ दशक की पीढी का नसीब वह रफ़ी साहेब के ज़माने मे पैदा हुए. वह लोग जिन्होंने रफी को लाइव भी सुना फ़िर जो नयी फ़सल आई उसमे किशोर कुमार की दीवानगी रही. सत्तर के दशक में संगीत की महफ़िल मे किशोर दा की जबरदस्त मौजूदगी के बावजूद मो रफ़ी ने बेहतर गीत दिए : दिन ढल जाए (गाईड), क्या हुआ तेरा वादा (हम किसी से कम नही), बडी दूर से आए है (समझौता), राही मनवा दुख की चिंता ( दोस्ती) , हुई शाम उनका ख्याल आ गया ( लाल पत्थर), गर तुम भुला न दोगे (यकीन), नफ़रत की दुनिया को छोड के’ (हांथी मेरे साथी) जैसे गाने इस सिलसिले में काबिले जिक्र हैं.
शक्ति सामंत की ‘आराधना’ से सत्तर के दशक में किशोर कुमार की मकबूलियत काफी आगे हो चुकी . यह किशोर दा का वक्त रहा जो नासिर हुसैन की ‘हम किसी से कम नहीं’ के पहले तक कायम रहा. यह सुपरस्टार राजेश खन्ना का भी जमाना था . किशोर कुमार को राजेश खन्ना के सुपरहिट गीतों के अंदाज़ ने उन्हें बीस-तीस बरस जवां कर दिया. किशोर कुमार व मो रफ़ी की गायकी का अंदाज़ अलग था . रफ़ी एवं किशोर कुमार में से किसी एक को अधिक महान बताना उचित न होगा क्योंकि दोनों का अंदाज़-ए-फ़न अलग रहा.

एस. तौहीद शहबाज़ द्वारा लिखित

एस. तौहीद शहबाज़ बायोग्राफी !

नाम : एस. तौहीद शहबाज़
निक नाम : Shahbaz
ईमेल आईडी :
फॉलो करे :
ऑथर के बारे में :

सैयद एस. तौहीद जामिया मिल्लिया के मीडिया स्नातक हैं। सिनेमा केंद्रित पब्लिक फोरम  से लेखन की शुरुआत। सिनेमा व संस्कृति विशेषकर फिल्मों पर  लेखन।फ़िल्म समीक्षाओं में रुचि। सिनेमा पर दो ईबुक्स के लेखक। प्रतिश्रुति प्रकाशन द्वारा सिनेमा पर पुस्तक प्रकाशित passion4pearl@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

अपनी टिप्पणी पोस्ट करें -

एडमिन द्वारा पुस्टि करने बाद ही कमेंट को पब्लिश किया जायेगा !

पोस्ट की गई टिप्पणी -

हाल ही में प्रकाशित

मनुष्य होने के सन्दर्भ तलाशते लयबंध: समीक्षा (उमाशंकर सिंह परमार)

मनुष्य होने के सन्दर्भ तलाशते लयबंध: समीक्षा (उमाशंकर सिंह परमार)

उमाशंकर सिंह परमार 240 2019-06-02

बृजेश लय आधारित विधा के सफल और नामचीन कवि हैं। उनके लयबन्धों पर लिखना चुनौती भरा काम है। अमूमन गीतों और गज़लों की समीक्षा में व्याकरण व भावनात्मक आवेगों की प्रतिच्छाया सक्रिय रहती है आलोचक वाह-वाही की शैली में स्ट्रक्चर पर अपनी बात रखकर आलोचना की इतिश्री कर देते हैं। वह गीतों और बन्धों की वैचारिक विनिर्मिति और समाजशास्त्र पर जाना ही नहीं चाहते हैं। इससे हिन्दी कविता के क्षेत्र में गज़ल और गीतों को दोयम माना जाता रहा है। यह कमी विधा की नहीं है आलोचना की कमी है कि गीतों और बन्धों में समाजशास्त्रीय आलोचना को नहीं लागू किया गया वह अब भी अपने परम्परागत आलोचना प्रतिमानों द्वारा मूल्यांकित की जा रही है।

हंसी व सामूहिकता को बचा कर रखता है रंगमंच: आलेख (अनीश अंकुर)

हंसी व सामूहिकता को बचा कर रखता है रंगमंच: आलेख (अनीश अंकुर)

अनीश अंकुर 159 2019-05-25

डिजीडल दुनिया में भले मनुष्य आभासी दुनिया में एक दूसरे से जुड़े रहते हैं लेकिन यथार्थ में उनका सामूहिक जीवन पर बेहद घातक प्रभाव पड़ा है। हमारी सामूहिकता, एक दूसरे के साथ हंसना-बोलना सब पर बुरा प्रभाव पड़ा है। भोपाल के रंगनिर्देशक बंसी कौल ने रंगविदूषक की ऐसी ही अवधारणा पर काम किया है। वे कहते है ‘‘ रंगविदूषक में हम यह मानकर चलते थे कि हमारा काम एक असलहा है। आपको कुदरत ने ऐसा हथियार दिया जिसे बनाए रखना जरूरी है। यदि आप विचार को बचाकर रखोगे आप अपनी आध्यामिकता को बचाकर रखोगे क्योंकि जो हंसी-ठठा होता है, वह सामूहिक होता है। लेकिन आप उसी पूरी हंसी को खत्म कर दोगे तो आप सामूहिकता को भी खत्म कर रहे हैं जिसकी हमारे समाज को बहुत जरूरत है। ’’ नाटक यही काम करता है वो आपका मनोरंजन करता है, हंसाता है। ताकतवर लोगों पर भी हंसने की क्षमता प्रदान करता है। बकौल बर्तोल्त ब्रेख्त ‘‘ जिस नाटक में आप हंस नहीं सकते वो नाटक हास्यास्पद है।’’

तितलियाँ बेचैन हैं: कहानी (सुभाष पंत)

तितलियाँ बेचैन हैं: कहानी (सुभाष पंत)

सुभाष पंत 244 2019-05-01

वह स्वर्ण युग था जिसमें शेर और बकरी एक घाट पानी पीते थे। वर्तमान कितना घिनौना है, यह बताने की मैं कोई आवश्यकता अनुभव नहीं कर रहा। उसे तो तुम देख ही रही हो। मेरा बस चले तो मैं वर्तमान को अतीत में बदल दूँ। दरअसल मेरी मुख्य चिंता ही यह है।’ कछुए ने आध्यात्मिक दर्प के साथ कहा। तितलियों ने अनेक बार इसी किस्म के सनातन वक्तव्य सुने थे, जिनका नाभिनाल अतीत में गड़ा होता है। अतीत के प्रति पूरा सम्मानभाव रखने के बावजूद वे इस तरह के वक्तव्यों से ऊब चुकीं थीं। एक प्रगल्भ तितली ने तुरन्त अपना विरोध प्रकट किया, ’इसका मतलब तो यही हुआ सर कि यह ऐसी व्यवस्था थी जहाँ शेर को शिकार करने के लिए भटकना नहीं पड़ता था। वह उसे बिना परिश्रम के उसी घाट पर उपलब्ध हो जाता था, जहाँ वह पानी पीता था। यह तो सर शोषक की आदर्श स्थिति हुई, शोषित की नहीं।’

स्त्री अधिकारों का 'मौन अनुबंध' कविता समीक्षा (गणेश गनी)

स्त्री अधिकारों का 'मौन अनुबंध' कविता समीक्षा (गणेश गनी)

गणेश गनी 245 2019-04-29

हिंदी साहित्य में ऐसे धूर्त साहित्यकार भतेरे हैं जो स्त्री विमर्श की आंच पर अपनी साहित्यिक रोटियां तो सेकते हैं, जो महिलाओं पर केंद्रित कविताएँ तो लिखते हैं, जो महिला विशेषांक भी निकालते हैं और सम्मेलनों में जाकर भाषण झाड़ते हैं कि उनसे बड़ा औरतों का संरक्षक कोई और है ही नहीं, परन्तु असलियत कुछ और ही होती है और वो यह कि उनके विचार इन सबसे एकदम उलट होते हैं। इनकी मानसिकता तब और भी उजागर हो जाती है जब ये दारूबाज पार्टियों में अपनी घिनौनी सोच को जगज़ाहिर करते हैं। दरअसल हमारे समाज में अब भी स्त्रियों को वो सम्मान और हक अभी नहीं मिले हैं, जिनकी वे वास्तव में हकदार हैं। आज भी अधिकतर चालाक पुरुष उसे अपनी सम्पति से अधिक कुछ नहीं समझते। कवयित्री भावना मिश्रा की अधिकतर कविताएँ ऐसी मानसिकता पर गज़ब की चोट करती हैं। भावना मिश्रा ने पुरुष मानसिकता की कलई शानदार तरीके से खोली है-

नोट-

हमरंग पूर्णतः अव्यावसायिक एवं अवैतनिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक साझा प्रयास है | हमरंग पर प्रकाशित किसी भी रचना, लेख-आलेख में प्रयुक्त भाव व् विचार लेखक के खुद के विचार हैं, उन भाव या विचारों से हमरंग या हमरंग टीम का सहमत होना अनिवार्य नहीं है । हमरंग जन-सहयोग से संचालित साझा प्रयास है, अतः आप रचनात्मक सहयोग, और आर्थिक सहयोग कर हमरंग को प्राणवायु दे सकते हैं | आर्थिक सहयोग करें -
Humrang
A/c- 158505000774
IFSC: - ICIC0001585

सम्पर्क सूत्र

हमरंग डॉट कॉम - ISSN-NO. - 2455-2011
संपादक - हनीफ़ मदार । सह-संपादक - अनीता चौधरी
हाइब्रिड पब्लिक स्कूल, तैयबपुर रोड,
निकट - ढहरुआ रेलवे क्रासिंग यमुनापार,
मथुरा, उत्तर प्रदेश , इंडिया 281001
info@humrang.com
07417177177 , 07417661666
http://www.humrang.com/
Follow on
Copyright © 2014 - 2018 All rights reserved.