'इदिका राय' की कविताएं

बाल मंच कविता

Idika ray 314 2018-12-10

इदिक़ा राय अभी भले ही महज़ आठवीं की छात्रा हैं किंतु इनकी कविताओं ने जैसे बचपन से बाहर देखना शुरू कर दिया है । इदिक़ा की कविताओं की यह दृष्टि नतीजा है स्कूल पाठ्यक्रम के साथ साथ अन्य साहित्यिक कृतियों का निरंतर अध्ययन । बाक़ी फ़ैसला आप पाठकों का ॰॰॰॰॰

1. दूसरी कहानी

भटक जाता है

कहीं दूसरी दुनिया में,

खो जाता है 

खुद की ही कल्पना में,

भूल जाता है

आस पास की दुनिया,

सोच में डुबा देने वाला ये मन

गड़ता है खुद की दूसरी कहानी।


२. भीड़    


बड़ी है,

चौड़ी भी है,

गंदी भी है, 

सिमट कर रह जायेगी,

मर जाएगी सच्चाई इस में,

कुचल देगी बिना किसी बात के ....... 

ये भीड़।


३. डर 

अंधेरे में बैठा 

सोच में डूबा हुआ, 

सवाल करता कि 

क्या है सब से डरावनी चीज़,

बिना कुछ बोले

जवाब  की जिज्ञासा के साथ

मंजिल पर पहुँचकर बोला,

जवाब है डर।

Idika ray द्वारा लिखित

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